STORYMIRROR

Shivam Sharma jai shri krishna

Romance Classics

4  

Shivam Sharma jai shri krishna

Romance Classics

दिल के अल्फाज

दिल के अल्फाज

1 min
191

दिल के अल्फाजों को कैसे बयां करूं

को कैसे बयां करूं

कभी कलम और कागज पर लिखा करूं

 कैसे तुम मिल पाओगी सोचा नहीं

 खुदा से हर दम यूं ही दुआ करूं

 

 ए हसीना अंजाम की की परवाह नहीं

 तुझसे मिलने हर दफा सोचा करूं

 हम पर थोड़ी सी रियायत और करो

 तुमसे मिलने की शिकायत ना करो

दिल के आंसू को कैसे रोका करूं 


जुल्म न ए बेवफा मुझ पे करो

तुमसे यह नजरें मिलें ये दुआ करो 

 ए हसीना तुझ पर दिल दिया करूं

 तुम से ये ही इनायत किया करूं


कतरा कतरा यह दिल ना किया करो

 ठोकर इस दिल को यूं ना दिया करो 

ऐ सनम तुझसे मोहब्बत किया करूं

दिलबर तुम पर शायरी लिखा करूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Shivam Sharma jai shri krishna

Similar hindi poem from Romance