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Ritu Rose

Inspirational

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Ritu Rose

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धूप और छांव

धूप और छांव

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जैसे धूप और छाया

वैसी ही है यह माया

हंस कर जी ले यह जीवन

यह जीवन है वरदान


गम के पीटे रोज ढूंढेरे

क्यों मूर्ख इंसान

माया भागे आगे आगे

पीछे पीछे भाग रहा

क्या लेकर लाया है

क्या लेकर जाना

क्यों नहीं जाग रहा


क्या खोना है क्या पाना है

अब तक सबने यह माना है

यही तो है विधि का विधान

इस गहरी नींद से जाग जरा

जो भी है तेरा दामन भरा

हंस कर जी ले यह खुशियां


मत कर दुखड़ा का बखान

सुन मुर्ख इंसान

अपने लिए जी

अपनों के लिए जी

यह जीवन है वरदान

सुन मूर्ख इंसान

यह जीवन है वरदान।


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