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Shalinee Pankaj

Abstract

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Shalinee Pankaj

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दहलीज

दहलीज

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दहलीज एक सुरक्षा है

मर्यादा है नियमों का,

उसूलों का

लगाम है अति की

एक सीमा है

जो बांधती है

परिवार से, प्रेम से

अपनत्व से


जैसे नदी

दो साहिल के बीच

बहती है अपनी वेग में

दिल की दहलीज तक

गर कोई दस्तक दे जाता है

फिर भी हर किसी के

लिए बंद रहते है 

हृदय के ये पट

रूह झाँकती है आँखों से

देखती है बाहर की दुनिया

मानो जिस्म की दहलीज है


ये दो नैना

हमे अपनी हद में रहना,

और हद में रह के उड़ान भरना

अपने सपनों को देखना

उन्हें पूरा करना

पर दहलीज में रह के

कितनी सीखें

मिलती है दहलीज से

गिरना नहीं, गिर के संभालना

कितनी भी ऊंचाई तक उड़ान भरना

पर आदत सी हो जाती है

अपनी हदों में रहना



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