डर रहता नहीं
डर रहता नहीं
जहां स्नेह का सागर बहता है,
वहां दुश्मन का डर रहता नहीं,
जहां जीवन में पवित्रता रहती है,
वहां बदनामी का डर रहता नहीं।
जहां मन में निर्मलता बहती है,
वहां किचड़ का डर रहता नहीं,
जहां सत्य बोलने की आदत है,
वहां झूठ सहने का डर रहता नहीं।
जहां प्यार की सरिता बहती है,
वहां नफ़रत का डर रहता नहीं,
जहां प्रेम की ज्योत जलती है,
वहां बेवफाई का डर रहता नहीं।
जहां जीवन में खुशियां लहराती है,
वहां गमगीनी का डर रहता नहीं,
जहां धर्म का जय जयकार है "मुरली",
वहां अधर्म का डर रहता नहीं।
