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Jyoti Deshmukh

Inspirational

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Jyoti Deshmukh

Inspirational

Day-24 मालवा साम्राज्य

Day-24 मालवा साम्राज्य

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मालवा के लिए चांडी गाँव में एक नन्हा फूल खिला था 

चाँदनी रात में होल्कर वंश के लिए एक चाँद चमका था 


चौडी गाँव में एक चरवाहे के घर जन्मी थी 

होल्कर वंश में ब्याही थी 

न्याय प्रिय, मृदु भाषी मालवा की रानी अहिल्या ने अपनी पहचान बनाई थी 


बाल विधवा रेणु उसकी प्रिय सखी थी 

सासू माँ के साथ रहती धर्म अपना निभाती 

प्रजा के दुःख को देख नहीं पाती मुश्किल में सबका साथ निभाती 


खण्डे राव होल्कर की पहली पत्नी रानी अहिल्या और दूसरी पत्नी पार्वती बाई साहेब थी 

दोनों रानी खण्डे राव की प्राणों से भी ज्यादा प्रिय थी 


समय बीता आँगन में दो फूल खिले माले राव, और मुक्ता बाई संताने थी 

माता-पिता के लाडले, दादा, दादी के राज दुलारे थे 


अहिल्या सास ससुर की प्यारी बहू थी 

मालवा का अभिमान, मालवा साम्राज्य का गौरव थी 


एक दिन काला अंधकार मंडराता खण्डे राव वीरगति को पाया 

ससुर मल्हार राव होल्कर ने सती होने से बचाया 


जब ससुर बीमार हुए अहिल्या को मालवा का ताज पहनाया गया था 

रानी ने फिर राज्य सम्भाला था 


विधवा पुनः विवाह, नारी शिक्षा और नारी शस्त्र शाला में पहल कर

कुंए बावड़ी बनाकर प्रजा का विश्वास पाया 


शिवालयों को धार्मिक जगह स्थापित कर मथुरा, सोमनाथ का मान बढ़ाया था 

शिव शंभू की आराधना कर भोलेनाथ का आशीर्वाद पाया था 


अति धार्मिक, मृदु भाषी, अन्यायी की प्रतिघात थी 

कुशल शासक प्रजा की रखवाली वो अहिल्या बाई थी 


इतिहास के पन्नों में नाम उसका स्वर्णिम है 

मालवा की जनता करती उसको नमन है 

मालवा साम्राज्य की प्रजा के लिए एक प्रेरणा और वो सदा अमर हैं।



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