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Mamta Singh Devaa

Inspirational

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Mamta Singh Devaa

Inspirational

' चुनौती किसको देते हो ? '

' चुनौती किसको देते हो ? '

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चुनौती किसको देते हो 

कि जाकर रसोई संभालो ?

उसको जो नौ महीने जतन से 

तुमको प्यार से गर्भ में संभाली है ,


चुनौती किसको देते हो 

की तुमसे ना हो पायेगा ?

उसको जो मृत्यु से लड़ कर 

तुमको इस दुनिया में लाई है ,


चुनौती किसको देते हो

की अपनी औकात मत भूलो ?

उसको जो अपना सब छोड़ कर

तुमको खुश रखने में सब भूल जाती है ,


चुनौती किसको देते हो

की अपने घर से यही सीख कर आई हो ?

उसको जो पहला ककहरा 

तुमको जीवन का सीखाती है ,


चुनौती किसको देते हो 

की अपनी हद में रहो ?

उसको जो उड़ना जान कर भी

तुमको अपने पंख दे देती है ,


चुनौती किसको देते हो

की ज्यादा सपने मत देखो ?

उसको जो तुम्हारे सपने सच हों

इसके लिए निराजल रहती है ,


चुनौती दे देकर तुमने

उसको मजबूर कर दिया

उसके मौन ने कुछ ज्यादा 

तुमको मग़रूर कर दिया ,


सुनो ! चुनौती उसको देते हैं

जब सामने वाला बराबर का होता है , 

अगर बराबरी में मुकाबला हो तो

परिणाम उन्नीस - बीस होता है ,


चुनौती उसको कैसे दे सकते हो ?


जो सहनशीलता की पराकाष्ठा हो

जो खुद अपने आप में आस्था हो ,

जो ममत्व - ममता की मूरत हो

जो धरती पर देवी की सूरत हो ,


जो देवों का देवालय हो

जो ऊँचाई में हिमालय हो ,

जो अनंत शक्ती हो

जो शिव की भक्ति हो ,


जो हिम्मत में दुर्गा हो 

जो क्रोध में काली हो ,

जो भरी हुई गागर हो

जो अथाह अगाध सागर हो ,


इनको चुनौती दे कर

कहाँ तुम जाओगे

पूरी धरा पर घूम कर

इनकी शरण ही आओगे ।



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