चरित्र की शक्ति
चरित्र की शक्ति
क्या चरित्र की शक्ति ईमानदारी से परिभाषित होती है?
या दृढ़ता, उत्तरदायित्व और सहनशीलता से पहचानी जाती है?
सुदृढ़ चरित्र तो एक अनमोल रत्न है,
न स्वर्ण-मुकुट, न शक्ति की तलवार,
अंतरात्मा के प्रकाश से बढ़कर नहीं कोई संसार। …………………… (1)
जीवन की इस लंबी राह पर,
मनुष्य को मिलती हैं चुनौतियाँ, अनेक रूप और आकार।
चरित्र की शक्ति माँगती है सिद्धांतों पर अडिग रहना, साहस से आगे बढ़ना,
जब तूफ़ान जीवन को झकझोर दें,
जब सपने टूटकर बिखर जाएँ,
जब दुःख हृदय पर भारी हो जाएँ। ……………………………… (2)
चरित्र की शक्ति वही कहलाती है,
जो विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ती है,
जब राह में असफलताएँ और निराशाएँ दस्तक देती हैं,
जब जीवन का हर रंग धूसर पड़ जाता है,
और आशा की किरण भी कहीं खो जाती है। ……………………………… (3)
जब हम इतिहास के पन्नों को पलटकर देखते हैं,
तो अनेक महान आत्माएँ उज्ज्वल होकर सामने आती हैं,
जिनके निष्कलंक चरित्र ने उन्हें सबसे अलग पहचान दी।
मदर टेरेसा भी थीं ऐसी ही एक महान विभूति,
जिन्होंने हर मानव के प्रति करुणा और सेवा की ज्योति जलाई। …………………… (4)
हमारे राष्ट्र का गौरव,
सिद्धांतों पर अडिग और एक महान उद्देश्य के प्रति समर्पित,
जिसे प्रेम से ‘बापू’ कहकर पुकारा गया,
उन्होंने चरित्र की महान शक्ति का परिचय दिया,
और अपना संपूर्ण जीवन
हम सबकी स्वतंत्रता के लिए अर्पित कर दिया। ……………………………… (5)
महान विवेकानंद, हाथों में प्रज्वलित मशाल लिए,
भारत आज भी श्रद्धा से स्मरण करता है आपका नाम।
आपका जीवन बन गया एक शाश्वत आह्वान—
कि हम अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचानें,
और उस शक्ति का प्रकाश
समूची मानवता तक पहुँचाएँ। …………………………………… (6)
और जीवन की अंतिम साँस के बहुत आगे भी,
उन्होंने जो प्रकाश जलाया, वह राह दिखाता रहेगा।
क्योंकि जिनके हृदय सच्चाई से भरे होते हैं,
उनके पदचिह्न समय की रेत पर नहीं मिटते—
वे इतिहास के पन्नों पर अमिट निशान छोड़ जाते हैं। …………………………………… (7)
