हाँ मुझे भी हसाना है
हाँ मुझे भी हसाना है
छोड़ उदासी का आलम ये,
मुझे भी हसाना महकना है,
लंगड़ी, फुगड़ी, छुपन छुपाई खेल के,
गुज़रा वक्त फिर जीना है।
घूर अंधियारे के पर्दे को,
चीर के ये पल जीना है,
बाग़ बग़ीचे में जाकर फिर,
तितलियों के साथ खेलना है।
अहंकार, घमंड को तज के,
मासूमियत में जीना है,
तोड़ आडंबर की दीवारों को,
बच्चों जैसे हसना है।
एक दिन वह फिर आएगा,
हर बूढ़ा बच्चा बन जाएगा,
बच्चों जैसी प्रकृति से,
हर जीव मुस्कुराएगा।
अपने अंदर के बच्चे के,
खुल के बहार आने दो,
झूठ और भुलावे के,
आपने जीवन से विदा करो।
