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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational

चलो कुंभ चले..

चलो कुंभ चले..

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जहां हो तीन नदियों का संगम

बहती निर्मल अविरल धारा है

इस कुंभ की पावन नगरी में

बस जाएं ये सौभाग्य हमारा है ।


अमृत की बूंदें जहां हैं छलकी

संस्कृति परंपराओं का डेरा है

कण कण में घुली है सनातन शक्ति

मिट जाता पापों का घेरा है।


श्रद्धाभाव से जब डुबकी लगे

हर प्राणी यहां पुण्य कमाता है

अहंकार का हो जाता समूल नाश 

तब पाप धरा से मिट जाता है ।


आस्था और विश्वास यहां

लहरों में अटखेलियां करते हैं 

तैंतीस कोटि देवी देवता भी

संगम पर अमृत वर्षा करते हैं।


भोर में बजती मंदिरों की घंटियां 

शंखनाद प्रतिदिन गूंजते हैं

प्रयागराज की अद्भुत यात्रा पर 

हवन कुंड भी प्रज्वलित होते हैं।


चलो चले इस महाकुंभ में 

जीवन को सार्थक कर आएं

साधु, संतों का मिलें आशीर्वाद

चलो हम भी संगम में तर आएं।


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