STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

4  

Kavita Sharrma

Abstract

चित्रकार

चित्रकार

1 min
281

ऐ- चित्रकार

अपनी कल्पनाओं को

नये रंगों से भर देते हो 

सूने पड़े जीवन फिर से

नई उम्मीद भर देते हो

रेखाओं को जोड़ कर

चमत्कार बस कर देते हो 

निर्जीव सी धुंधली छवियों को

साकार सा कर देते हो

रंग भरो अब की बार ऐसे

प्रेम रंग चहूं ओर बिखरे

नफ़रत का कोई नाम न रहे

शांति और सौहार्द ही पनपे

चित्रों में भी भाषा होती है

मन तक जो सीधी जाती है

बस तूलिका से कोई चमत्कार कर दो

दुनिया को खुशी के रंगों से भर दो।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract