anuradha nazeer
Drama
स्वयं बोलने का
अभिमान !
वह कहता है।
जलन हो रही !
मुझे होना चाहिए।
लालची !
ये हमेशा से हैं
एक आदमी
को जीने नहीं छोड़ेगा।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ? आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ?
एक शिक्षक का काम छात्रों को अपने आप में जीवन शक्ति देखना सिखाना है, एक शिक्षक का काम छात्रों को अपने आप में जीवन शक्ति देखना सिखाना है,
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ? या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ?
आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।। आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।।
नृत्य तुम्हारी नाड़ी है, तुम्हारी धड़कन है, तुम्हारी श्वास है, यह आपके जीवन की लय है नृत्य तुम्हारी नाड़ी है, तुम्हारी धड़कन है, तुम्हारी श्वास है, यह आपके जीवन ...
जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा, जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा।। जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा, जा एकांत में छोड़ मुझे अभी चला जा।।
और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में। और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में।
कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में। कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में।
मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है, मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है,
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे। बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे।
यद्यपि गाँव की शीतलता बहुत भाती है, पर शिथिलता यहाँ की अखरती है, यद्यपि गाँव की शीतलता बहुत भाती है, पर शिथिलता यहाँ की अखरती है,
आखिर तुमने भी नारायण अपनी भू देवी को पहचान कर की ही चुना होगा आखिर तुमने भी नारायण अपनी भू देवी को पहचान कर की ही चुना होगा
कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना। कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना।
इस बिना शस्त्र के युद्ध में कितने अपने चले गए इस बिना शस्त्र के युद्ध में कितने अपने चले गए
नरसंहार का मतलब सिर्फ सामूहिक हत्या नहीं है, विनाश के स्तर तक, नरसंहार का मतलब सिर्फ सामूहिक हत्या नहीं है, विनाश के स्तर तक,