STORYMIRROR

Yudhveer Tandon

Abstract

3  

Yudhveer Tandon

Abstract

छाँव बुजुर्गों की

छाँव बुजुर्गों की

1 min
247

अहसास स्व सुरक्षा का

भीषण सूखे में वर्षा का

तपती धूप में छाँव का

पहली जीवन कक्षा का


अनुभव का भण्डार हैं

ज्ञान का गजब द्वार हैं

जीने की वो मिसाल हैं

किस्से कहानी अपार हैं


आत्मा में इनकी गावँ हैं

संस्कारों में ठण्डी छाँव हैं

ढूंढ लो चाहे जितना मर्जी

जन्नत तो माँ तेरे ही पावँ हैं


हम साँये से ये साथ रहते हैं

सिर सदा इनके हाथ रहते हैं

कैसी भी हो परिस्थितियाँ ये

बच्चों संग दिन रात रहते हैं


कर्त्तव्य निर्वहन सम्पूर्ण जीवन

बांधे रखें पूरा कुल बन रीबन

इतिहास के साक्षात साक्षी ये

अंधेरे में राह दिखाएँ बन किरण।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract