चाय की प्याली
चाय की प्याली
ये कुछ अंजुमन और कुछ कहकहे
ये जुस्तजू और कुछ हसरतें
ये सिलसिले और कुछ शिकायतें
इन सब के दरम्यान...
एक अदद चाय कि प्याली
सुकून का पल लिए हुए,
जिंदगी शायद चाय ही तो है
चाय पत्ती की तरह कड़वी
एहसासों को जगाती हुई
शक्कर की तरह मीठी
एहसासों को सहलाती हुई
पीसी हुई महकती हुई
अदरक इलायची के जैसे
इसमें रगंत है, तो करारापन भी
इसमें गर्माहट है, तो सांवलापन भी
शायद ही कभी थकेंगे इससे
भले ही वो हमसे थक जाये
अपना तो इतना ही सामान रहा.
