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V. Aaradhyaa

Abstract Romance

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V. Aaradhyaa

Abstract Romance

चाक ज़िगर हो गया

चाक ज़िगर हो गया

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हमें वक्त लगेगा पहचान बनाने में ,      

      डरो मत ख्वाब को सच बनाने में !


आओ चलो देखें प्यार के रिश्ते,

      क्या लागत लेते हैं इसे निभाने में!


तृप्त होता हमारा हृदय ,

       अपनों संग वक़्त बिताने में!


तुम्हीं कह दो ज़रा हमें कि,

     इससे बड़ी कोई है ख़ुशी ज़माने में!


 चाक ज़िगर हो गया हमारा,

    कहते हैं, तकलीफ क्या है मुस्कुराने में!


हमने तो कई दफा बुलाया उन्हें ,

    पर उन्होंने बहुत ही देर कर दी आने में!



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