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Bhargavraj Mor

Abstract

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Bhargavraj Mor

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चाहत

चाहत

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अगर हर चीज चाहने से मिल जाती, 

तो खुदा भी आज हमारा होता.....


चाहने की चाहत रखने वालों की चाहत

हमेशा अधूरी रह जाती है .....


 मिलने वालों को खुदा भी मिल जाता है,

      और हम जिसे चाहते हैं,

           उसे खुदा भी ढूंढने निकला है .....


ऐ खामोशी के नुमाइनो आज तो दरवाजा खोलो,

 उसे पाने के लिए मैं खुदा से लड़ आया हूँ .....

  

अगर तुम्हारे प्यार की कोई बोली लगती,

 तो हम फकीर भी अपना जमीर बेचकर खड़े रहते.....


अगर रेत के समुंदर में नाव चलाने वाला मूर्ख है,

 तो हम भी ऐसे मूर्ख बनना चाहेंगे.....


    


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