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Shweta Mangal

Abstract

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Shweta Mangal

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चाह

चाह

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वो हाथ जिसे थाम चली थी

 कुछ पल

वो साथ जिसके दम पर बढ़ी थी

कुछ कदम।


 वो साथ काश

मुझे आज फिर मिल जाये

जीवन के इन क्षणों में

फिर एक बार उन रास्तों पर,


फिर उस साथ के दम पर

कुछ कदम चलने की


चाह जाग उठी है

इस नन्हे से

मासूम दिल में I


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