बुरी लत
बुरी लत
इस आधुनिक युग में
अक्सर ये नज़र आता है
कि कुछ लोग प्रातःकाल
भ्रमण के लिए
निकला तो ज़रूर करते हैं ,
मगर विडंबना यह है कि
दुर्भाग्यवश उनका पूरा ध्यान
अपने कदमों की गति पर नहीं ,
बल्कि अपने
चलंत दूरभाष यंत्र पर ही
टिका रहता है...!
ये कैसा प्रातः भ्रमण है ,
कुछ समझ में नहीं आता !
एक तरफ तो वो
अपनी तोंद को घटाने की
अनेकों परियोजनाएं
बनाते नहीं थकते...
मगर दूसरी तरफ
वो अपने
'चलंत दूरभाष यन्त्र' में
'स्टेटस' देने और
'रील्स' बनाने में ही
व्यस्त रहते हैं... !
वो क्या खुद को भूलवश
फ़िल्मी सितारों की
तथाकथित झूठी 'मायानगरी' में
शामिल पाते हैं ?
यह तो बहुत ही
हास्यास्पद विषय है ,
क्योंकि ऐसे लोग
अपने दिखावे की प्रातः भ्रमण के बहाने
अपने 'चलंत दूरभाष यंत्र' से
अप्रत्याशित लगाव की वजह से
अपने स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती से
खिलवाड़ करते फिरते हैं... ,
जिसका भुगतान उन्हें
आनेवाले समय में
निसंदेह ही करना पड़ेगा !!!
ऐसे लापरवाह लोगों से
मेरी बस यही गुज़ारिश है
कि वो ज़रा
सुबह की सैर के
शिष्टाचार पर ग़ौर करें
और अपनी बुरी लत की वजह से
दूसरे राहगीरों को
तकलीफ़ न दिया करें...!!!
उनसे एक ही इल्तेज़ा है
कि वो जब
प्रातःभ्रमण को निकलें,
तो अपना 'चलंत दूरभाष यंत्र'
घर पर ही रख कर आएं...
और अपना पूरा ध्यान
प्रकृति के संस्पर्श में लगाएं...
ईमानदार बनें !
