Arvina Ghalot
Comedy
साठ के पार हुआ कि
सनक ने आ घेरा,
दुख देने लगा पेट का
बढ़ता हुआ घेरा,
नहीं लगाई जो तूने
खाने पे लगाम,
तेरे घुटनों की हो जायेगी
बोल सिया राम,
चल भी नहीं पायेगा,
बस बैठकर पछताएगा।
लाल ओढ़नी
तुम कविता हो
बाकी हैं, उजा...
यादों की कंदी...
सावन झड़ी लाग...
मेरे हमसफ़र
इस दिल के किं...
विश्वास की डो...
सितम बिखरा पड...
मेरे अंगने मे...
भारतीय लोकतंत्र को समर्पित एक भावान्जलि भारतीय लोकतंत्र को समर्पित एक भावान्जलि
इन ग्रहों के चक्कर में हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया । इन ग्रहों के चक्कर में हमारी शादी का चक्कर चल नहीं पाया ।
सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती, सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती,
चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है। चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है।
बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की सूझी। बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की ...
न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग
चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए। चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए।
पर छली जाती हर पापी से बारम्बार। वेदना इसकी कोई न जाने, करते सब इसका ही संहार। पर छली जाती हर पापी से बारम्बार। वेदना इसकी कोई न जाने, करते सब इसका ही संहार...
आप दोनों में ये अनुपम सामंजस्य हो ये अजूबा हो ही नहीं सकता है। आप दोनों में ये अनुपम सामंजस्य हो ये अजूबा हो ही नहीं सकता है।
आपके टिकट का अग्रिम अनुबंध हो गया है। बस! अब आप तैयारी कीजिए। आपके टिकट का अग्रिम अनुबंध हो गया है। बस! अब आप तैयारी कीजिए।
ट्रेन से टक्कर खाकर सिर मेरा खुल गया छोटा 'दिमाग़' मेरा वहीं, कहीं गिर गया। ट्रेन से टक्कर खाकर सिर मेरा खुल गया छोटा 'दिमाग़' मेरा वहीं, कहीं गिर गया।
वो पालतू भी यहीं को चला आ रहा है, हमारी तरह सड़क को गंदा कर रहा है। वो पालतू भी यहीं को चला आ रहा है, हमारी तरह सड़क को गंदा कर रहा है।
बिना कविता सुनने के कोई और मार्ग है क्या? बिना कविता सुनने के कोई और मार्ग है क्या?
जाओ कर लो ये शादी, बन जाओ पत्नी के डमरु। शा जाओ कर लो ये शादी, बन जाओ पत्नी के डमरु। शा
प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही रट लगाकर प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही र...
मेरे कामों का लेखा जोखा, तुमको बतलाती हूं l आओ तुमको अच्छे से मैं, क ख ग सिखलाती हूँ मेरे कामों का लेखा जोखा, तुमको बतलाती हूं l आओ तुमको अच्छे से मैं, क ख ...
दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया
जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !! जानूँ ! सारी !! मुझे देर हो गई !’ प्रीति पर्व की लो ढेरों बधाई !!
सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे, सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे,
साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते। साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते।