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Gzala Shakir

Abstract

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Gzala Shakir

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बसंत बहार

बसंत बहार

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मौसम है बहार का

प्यार के इजहार का


फूलों के खिलने का

दो प्रेमियों के मिलने का


सब मिलते हैं इस मौसम में

यह मौसम है बसंत बहार का


कहीं माली फूल लगाते हैं

कहीं भौरें फूल खिलाते हैं


जब ठंड गुलाबी होती है

तो सबके मन को भाती है


कहीं तितली रंग उड़ आती है

कहीं कोयल गीत सुनाती है।


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