STORYMIRROR

Gzala Shakir

Abstract

3  

Gzala Shakir

Abstract

बसंत बहार

बसंत बहार

1 min
361

मौसम है बहार का

प्यार के इजहार का


फूलों के खिलने का

दो प्रेमियों के मिलने का


सब मिलते हैं इस मौसम में

यह मौसम है बसंत बहार का


कहीं माली फूल लगाते हैं

कहीं भौरें फूल खिलाते हैं


जब ठंड गुलाबी होती है

तो सबके मन को भाती है


कहीं तितली रंग उड़ आती है

कहीं कोयल गीत सुनाती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract