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KAVY KUSUM SAHITYA

Abstract

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KAVY KUSUM SAHITYA

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बसन्त और रंगोली

बसन्त और रंगोली

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शौर्य सूर्य चमकता, दमकता, धमकता युग ब्रह्मांड    

घड़ी पल प्रहर दिन, महीने, साल का वर्तमान की

चुनौती निर्माता मज़बूत अधार              

अपेक्षा ,प्रेरणा के भविष्य निर्माण के पथ

का युग व्याख्याता।


युग अभिमान आशा॒ओ का जमीं आसमान शाबास कि

साहस उत्कृष्ट उत्कर्ष की ऊर्जा।

उल्लास, उत्साह, उमंग की तरंग का जाबज़          

विजेता विजय का पुरुषार्थ युवा, समाज,

राष्ट्र युग की बुनियाद परिभाषा पहचान।


 ब्राह्मण के संतुलन कि शक्ति सृष्टि कि निरन्तरता के

साश्वात सत्य कि अभिव्यक्ति कि नारी शक्ति

रंगों की बहार, रंगों की फुहार, रंगों का व्यवहार रंगोली       

सुरों सात रंगों कि रंगोली  संगीत,

सत रंगी इंद्र धनुष मानव मुस्कान कि बोली रंगोली। 


तरंग, उमंग, उल्लास, उत्सव, उत्साह, खुशी गम के जज्बे

जज्बात के रंगों कि मिली जुली जिंदगी रंगोली           

सत्कार, उदगार व्यवहार के भाव भावाना शृंगार रंगोली     

आओ मील कर जीवन के रंग में रंग बनाए मानव मूल्यों कि रंगोली               


गोरा, कला हो इंसान लहू रंग है सबका

लाल प्रेम शांति के रंगो कि रंगोली व्यवहार बनाए।


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