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KAVY KUSUM SAHITYA

Abstract


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KAVY KUSUM SAHITYA

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मजदूर

मजदूर

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श्रमयेव जयते,मेहनत कश संघर्षों

का मशाल इंक़लाब का ईमान.!      

मज़बूर् नहीं मज़लूम नहीं

मज़बूत इरादों की बुनियाद !   


सूर्योदय से संध्या तक तपिस,

ठंड ,वारिस हो या तूफान मौसम की

दूसवारी हो सामंती चक्रवात लड़ता!  


अपानी पूरी ताकत क्षमता से

बुलंद हौसलो का फौलाद !

सांसों धड़कन की आवाज़ खून पसीने की

रोज़ी रोटी का घर परिवार समाज़ !


साहस शक्ति की पूंजी हर

निर्माण का अधार !      

साशन साशक से सोशित हक़

हुकूक की क्रान्ति का अंगार!!        


दुनिया के मज़दूरों उठो अपने

मेहनत की दुनिया से मांगों हक़ जायज !              


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