STORYMIRROR

Neetu Lahoty

Abstract

4  

Neetu Lahoty

Abstract

बोझ कैसे हो गयी

बोझ कैसे हो गयी

1 min
171

पी उसने भी थी 

पी मैंने भी थी 

फिर वो शरीफ़ और

मैं गुनहगार कैसे हो गयी।

 

जिस्म बेचा मैंने था

तो ख़रीदा उसने था 

फिर वो इज्जतदार और 

मैं बाजारू कैसे हो गयी।

 

बनाया तो उसी खुदा ने

है दोनों को 

फिर वो चाहत और 

मैं बोझ कैसे हो गयी ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract