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Ghanshyam Sharma

Abstract

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Ghanshyam Sharma

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भूल गए बलिदानों को मैं याद

भूल गए बलिदानों को मैं याद

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गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ,

गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ,

भूल गए बलिदानों को...

भूल गए बलिदानों को, मैं याद दिलाता हूंँ।

गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ।।


याद करो उन लोगों को,

प्रीत जिन्होंने खोई थी,

भूल गए कैसे उनको,

बरसों आंख न सोई थी,


दर्द हज़ारों सहे,

फिर भी ये कहे,

देश मेरा रहे,

मैं जी-जान लगाता हूँ।


गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ।

भूल गए बलिदानों को, मैं याद दिलाता हूँ।

गीत सुनाता ...


भूल गए घरवाले भी,

कि कब से ना लौटा बेटा,

अपनी फिक्र कहां कि

दुख तो भारत मां का था मेटा,


गुलामी छूटे, भले सिर फूटे,

यह तन भी टूटे,

मैं अपने प्राण गवांता हूंँ।


गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ।

भूल गए बलिदानों को मैं याद दिलाता हूँ।

गीत सुनाता ...


क्या सुख देखा जीवन में,

बस आए आंसू पीया,

फांसी तक पर झूल गए,

फिर भी कहा "क्या किया ?


आस है अर्पित, सांस समर्पित,

देश हो हर्षित, मैं विश्वास जगाता हूंँ।

गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ।

भूल गए बलिदानों को मैं याद दिलाता हूंँ।


गीत सुनाता हूंँ, मैं गीत सुनाता हूंँ।

मैं गीत सुनाता हूंँ...।


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