STORYMIRROR

Kamal Madulkar

Tragedy Children

3  

Kamal Madulkar

Tragedy Children

भूख

भूख

1 min
47

बेहद जरूरी है

इस त्रासदी को लिखना

जहाँ बिलबिलाते

बच्चे की अंतड़ियों को

भूख की ज्वाला 

जलाकर भस्म कर 

देती हो

और खत्म कर 

देती हो 

मानवता के अन्तस्थ को

जहाँ एक ओर

हम शिक्षा, बालश्रम पर

चीख चीख कर 

अपने कंठ सुखाते है

लेकिन सच तो 

यही है

भूख से सूखी 

आंतो का 

शिक्षा और बालश्रम से 

कोई रिश्ता नहीं


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Kamal Madulkar

भूख

भूख

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Tragedy