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सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

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सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

बहिष्कार कोख का

बहिष्कार कोख का

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ऐ पुरूषों न इतना आतंक मचाओ 

मासूम कलियों की गर्दन यूं ना दबाओ

जीना चाहती हैं वो हक भी है उनका 

मौत की नींद इस कदर न सुलाओ 


जलाना है तो अन्दर के राक्षस को जलाओ 

इन प्यारी गुडियों को यूं न जलाओ 

घर से बाहर जब भी निकलो तुम 

मां, बहन, बेटी, पत्नी इन्हें देख जाओ 


ऐ पुरूष इस कदर तबाही न मचाओ 

बहुत हो चुका अब मान भी जाओ 

कहीं ऐसा न हो जाये, प्रकृति पर

 मानव जाति ही विलुप्त हो जाये 


ना जन्मे कोई दुनिया गर हम मन में ठाने 

किसी की ना सुनें बस दिल की मानें 

हम औरतें तुम्हें जन्म देने से इंकार कर दे 

अपनी कोख का ही बहिष्कार कर दें ....!


  



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