भिखारी
भिखारी
वह त्याग तपस्या की प्रतिमा
वह सहनशीलता की मूरत
जी, आप समझते होंगे कि
वह कोई संत पुजारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है
कौवे पर उसकी नज़र अड़ी
है चोंच में रोटी जिसके पड़ी
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई चतुर शिकारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है
जो जाति ,धर्म का भेद न जाने
जो मानव को बस मानव ही माने
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई धर्माधिकारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है
सब ऋतुओं में रहता समान
अपमान मान दोनों समान
जो मिल जाता खा लेता है
रूखा –सूखा ,ताज़ा-बासी
जी ,आप समझते होंगे कि
यह किसी की लाचारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है
