भाई
भाई
भाई ही नहीं तुम बचपन के दोस्त भी हो!
राखी बाँधने का हक दिया है तुमने
माँ को पुत्रवती होने का सौभाग्य दिया!
पापा के कंधों को मजबूत किया
कुल के कुलदीपक हो तुम !
हमने साथ-साथ स्कूल जाना
पढ़ना लिखना शुरू किया !
करते तो थे तुम शैतानियाँ
पर डाँट तो मैं भी खाती !
थी पड़ती जब मार तुम्हे
रोती तो मैं भी थी न !
चॉकलेट और आइसक्रीम
मिल बाँटकर थे खाते!
बचपन के दिन बीत गए पर
प्यार और मान सदा तुम देते !
पापा के हो सरताज तुम
तो माँ की आँखों के तारे !
प्रेम भरोसा सदा बनाए रखना
हर खुशी और गम में साथ निभाना !
नहीं चाहिए धन या कोई उपहार
बस बनाए रखना अपना व्यवहार !
माँ सा ही मायका बना रहे हरदम
घर की बगिया को महकाए रखना!
तुम स्वस्थ और खुशहाल रहो
जीवन की हर राहों पर सफल रहो !
हर रिश्ते को दिल से निभाना
हमेशा अपनों का खयाल रखना!
माँ पापा के सम्मान को बनाए रखना
अपने कुल की मर्यादा को निभाना !
