बेटियां
बेटियां
कभी पायल की झंकार हैं बेटियाँ,
कभी चूड़ियों की खनकार हैं बेटियाँ,
हँसी के फुहारे बिखेरती हुई,
खुशियों की सौगात हैं बेटियाँ।
बेटियों को दो उन्मुक्त आकाश,
ले सकें खुल कर वो साँस,
रूह में बसी हुई रहती हैं वो,
ले आये वो जीवन में प्रकाश।
माँ बाबा की अरमानों की आशा हैं,
संग जो रहे दूर करती निराशा हैं
दो कुलों को सहेजती समेटती वो,
पूरी करती सबकी अभिलाषा हैं।
चिड़ियों की तरह चहकती हैं,
फूलों की तरह महकती हैं
करती अपने गुलशन को मोहक,
प्यार से हैं वो चमकती हैं।
बेटियों को हौसलों की उड़ान दो,
उनके पंख को परवान दो,
धैर्य और संयम से बढ़ती वो,
उन्हें उड़ने को उन्मुक्त आसमान दो।
