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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

बेटे और बेटी में फ़र्क रखो मत

बेटे और बेटी में फ़र्क रखो मत

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मानवीय मूल्यों की माला

कविता- बेटे और बेटी में फ़र्क रखो मत


देश के समक्ष और भी मसले बहुत हैं,

इन मसलों को तुम और बढ़ाओ मत।

बेटे और बेटी में यूं बड़ा फ़र्क रख कर,

बच्चों की लम्बी कतारें लगाओ मत।


अपनी नादानी से मासूम बच्चों के,

भविष्य से खिलवाड़ तुम करो मत।

यूं जनसंख्या में अनावश्यक वृद्धि करके,

अपनी भी परेशानी खुद ही बढ़ाओ मत।


पानी, अनाज, बिजली, गैस, डीज़ल की,

बिन ज़रूरी मांगो को तुम बढ़ाओ मत।

देश की बेरोज़गारी और महंगाई को,

देखो यूँ ही तुम भी बढ़ाओ मत।


अपने बढ़ते परिवार की माँगो हेतु,

भ्रष्टाचार को देखो तुम बढ़ाओ मत।

अपने देश की अर्थव्यवस्था को भी,

देखो ऐसे ही तुम भी बिगाड़ो मत।


अरे बेटियां आज किसी पर बोझ नहीं हैं,

उनसे बेकार ही यूं तुम घबराओ मत।

बेटियां आज किसी से कम नहीं है,

इस बात को तुम झुठलाओ मत।


देश के हर क्षेत्र में बेटियां आज हैं कार्यक्षम,

फिर उनको यूं तुम ठुकराओ मत।

बेटियां दोनों कुलों को संभालने में हैं सक्षम,

इस बात से आज तुम इनकार करो मत।



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