HARSUKH RAIVADERA રાયવડેરા "હસુ"
Tragedy
बेरहम इस दुनिया में कई अपने
साथ छोड़ कर चले गये,
सिर्फ एक दर्द ही था जिसने
अपना बनकर आज तक साथ निभाया।।
हरसुख रायवडेरा
में गुलाम हु ...
शायरी
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बेरहम
दोस्ती
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बच्चों से महं...
वादा
क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ? क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ?
उस दिन पहली बार डर से सामना हुआ था .. उस दिन पहली बार डर से सामना हुआ था ..
मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थकान भी वापस लेती हूँ... मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थ...
तड़के-तड़के जगकर हमने सर्वप्रथम भोजन तैयार किया है, उसके पश्चात बाहरी दाव-पेंच के लिए तड़के-तड़के जगकर हमने सर्वप्रथम भोजन तैयार किया है, उसके पश्चात बाहरी दाव-...
#JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया, अशिफ़ा के साथ जोड़ गय... #JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया,...
तुम जीजाजी के लिए सिर्फ एक सेक्स स्लेव बन के रह गयी हो। तुम जीजाजी के लिए सिर्फ एक सेक्स स्लेव बन के रह गयी हो।
तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर आ जाता हू तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर ...
मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं। मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं।
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं। हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं।
आज बाबूजी कुछ कह रहे थे माँ से अवाज़ थी, पर जरा दबी हुई। आज बाबूजी कुछ कह रहे थे माँ से अवाज़ थी, पर जरा दबी हुई।
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
बम यहाँ कैसे आ सकता है इस चौक पर तो हमेशा पुलिस रहती है। बम यहाँ कैसे आ सकता है इस चौक पर तो हमेशा पुलिस रहती है।
उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..। उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..।
जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर। जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर।
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
उसने स्कूटी वहीं खड़ी की और दौड़ कर गेट के अंदर आई तो देखा कि दो लाश सफेद चादर में लिपटे उसने स्कूटी वहीं खड़ी की और दौड़ कर गेट के अंदर आई तो देखा कि दो लाश सफेद चादर में...
मेहनतकश आंशिक शिक्षित कम आदर नौकरी उसी स्तर शिक्षित होना एक पीड़ादायक मेहनतकश आंशिक शिक्षित कम आदर नौकरी उसी स्तर शिक्षित होना एक पीड़ादायक
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे। बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे।