Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here
Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here

Abhilasha Chauhan

Abstract


3  

Abhilasha Chauhan

Abstract


बदलती हवाएं बड़ी बेरहम हैं

बदलती हवाएं बड़ी बेरहम हैं

1 min 417 1 min 417

हवाएं अब बदल गईं हैं

शीतलता भी

कहीं गुम हो गई

अब ये हवाएं जलाती

बहुत है।


नमी आंसुओं की

इनमें अब नहीं हैं

पैगाम

किसी का लाती नहीं है

बदल दिया है।


इन हवाओं ने

इंसानी फितरत को

अब ये मरहम दिल पे

लगाती नहीं है।


देती हैं बेरहमी से घाव

अफवाहें ये फैलाती बहुत हैं

खंजर सी चुभती

हवाएं आज कल की

सुकूं दिल को ये पहुंचाती नहीं है।


उड़ा देती हैं पल में

सजे आशियाने

रहम बेरहम खाती नहीं है

खामोशी इनकी खटकती बहुत है

दिल को ये धड़काती बहुत है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Abhilasha Chauhan

Similar hindi poem from Abstract