Priyanka Sagar
Abstract
तू मेरे बचपन का यार
तू ही मेरा संसार
तू ही खुशियों का भंडार।
तू ही मुझे जीना सिखाया
तू ही मुझे मुस्कुराना सिखाया।
तू ही मेरी जिन्दगी बनाई
तू ही मेरे लिये जग से की लड़ाई।
तू जह पर मेरी जिंदगी कुर्बान
तू ही मेरे जीवन का सरताज।
पत्थर कोयला
नारी की जुबान...
रंग रंगीली दु...
नसीब
नशा
याद दिलाता मौ...
खुश हूँ....
अहोभाग्य
घर
तुलसी मैया
"स्टोरी मिरर" मंच ने ये, खूबसूरत परिवार बनाया है। "स्टोरी मिरर" मंच ने ये, खूबसूरत परिवार बनाया है।
भावना रहित करताजा रहा इंसान को पैसे का बढ़ता ताप। भावना रहित करताजा रहा इंसान को पैसे का बढ़ता ताप।
हम हमारे देश को बेहतर बनाना चाहते। जोश है जज़्बा भी है और प्यार भी इस दिल में है। हम हमारे देश को बेहतर बनाना चाहते। जोश है जज़्बा भी है और प्यार भी इस दिल में ...
जो कुदरत की देन, करूं उसे खुशी खुशी स्वीकार उसे संवारूं सजाऊं उसकी नेमत मान- जो कुदरत की देन, करूं उसे खुशी खुशी स्वीकार उसे संवारूं सजाऊं उसकी नेमत...
क्यों कभी कभी हमारे हिस्से की धरा बंजर सी हो जाती है, क्यों कभी कभी हमारे हिस्से की धरा बंजर सी हो जाती है,
यह दया शब्द है तो छोटा सा, पर विस्तृत है इसकी पहचान, सभी धर्मों को जो एक साथ लाए, है ध यह दया शब्द है तो छोटा सा, पर विस्तृत है इसकी पहचान, सभी धर्मों को जो एक साथ ...
मिलन की तीव्र भौतिक इच्छा या कभी कभी मृगतृष्णा में मिलन की तीव्र भौतिक इच्छा या कभी कभी मृगतृष्णा में
जिसे सुन लोग कहें दर्द का क्या है है यह आनी जानी जिसे सुन लोग कहें दर्द का क्या है है यह आनी जानी
कुछ अनजाने भी, निस्वार्थ साथ देते हैं कविताओं के जन्म लेने से कुछ अनजाने भी, निस्वार्थ साथ देते हैं कविताओं के जन्म लेने से
सुदामा कृष्ण जैसी दोस्ती तेरी मेरी यारा, "कमल" भूखा तू है तो मैं निवाला खा नहीं सकता। सुदामा कृष्ण जैसी दोस्ती तेरी मेरी यारा, "कमल" भूखा तू है तो मैं निवाला खा नह...
प्रियतम, यह कैसी विह्वलता है यह कैसा व्यवधान यह कैसी शिथिल मुस्कान यह कैसा अनुमान ? प्रियतम, यह कैसी विह्वलता है यह कैसा व्यवधान यह कैसी शिथिल मुस्कान यह क...
जो गिर जाए ऊंचाई से सिर्फ खूबसूरत कहलाने के लिए जो गिर जाए ऊंचाई से सिर्फ खूबसूरत कहलाने के लिए
प्रेम का फिर कष्ट क्यों यह, पर्वतों सा लग रहा है।। प्रेम का फिर कष्ट क्यों यह, पर्वतों सा लग रहा है।।
मगर हवा का झोंका ऐसा आया कहीं से ले गया उड़ा कर मेरे हर उद्वेग को मगर हवा का झोंका ऐसा आया कहीं से ले गया उड़ा कर मेरे हर उद्वेग को
ज़िन्दगी थोड़ी मुश्किल ज़रूर है पर जीना सीख लिया। ज़िन्दगी थोड़ी मुश्किल ज़रूर है पर जीना सीख लिया।
हमें खुशियां मनाने के लिए, साथियों का चाहिए होता साथ। हमें खुशियां मनाने के लिए, साथियों का चाहिए होता साथ।
सुख के हर इक अक्षर को, दुःख जाने कब धो जाये। सुख के हर इक अक्षर को, दुःख जाने कब धो जाये।
वो जब पास से निकल जाते मूर्ति भगवान सी महक उठती वो जब पास से निकल जाते मूर्ति भगवान सी महक उठती
कविताएं लिखी कहां जाती बस बन जाती हैं। कविताएं लिखी कहां जाती बस बन जाती हैं।
झाँक कर तुम ठीक से देखो रहीम के घर भी राम है। झाँक कर तुम ठीक से देखो रहीम के घर भी राम है।