बबुआ तूँ दूर कमाये जा
बबुआ तूँ दूर कमाये जा
बबुआ तूँ दूर कमाये जा
घर संसार चलावल मुसकिल,
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।
ई जिनगी के एक कहानी,
उठते मांगे दाना पानी।
बहुत होगइल काया माया,
सबके ई जान बचावे जा।
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।
बेंच दिहनी अंतिम निशानी,
माथ के उपर बहता पानी।
बेंचें के अब कुछना बाचल,
घरभर के लाज बचावे जा।
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।
हरदिन के बा एके रोना,
कतना झांकी कोना कोना।
जेने देखी खाली दोना,
जीवन के गीत बजावे जा।
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।।
हार गइल मन कहाँ जवानी,
ठठरी ठठरी राखे सानी।
लउकत नइखे केहू दानी,
जौने बा आज बचावे जा।
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।
ई जिनगी के कौन भरोसा,
रहरह होला रोज हताशा।
जाईब सुन होला दिलाशा,
छछनत ई हृदय जुड़ावे जा।
बबुआ तूँ दूर कमाये जा।
