STORYMIRROR

Meena Mallavarapu

Inspirational

4  

Meena Mallavarapu

Inspirational

बैर

बैर

1 min
319

बैर नहीं पालना मुझे किसी से

बैर है ही नहीं मुझे किसी से!

          जानती हूँ मैं-

बैर की दुश्मनी हर किसी से

दोस्ती है नहीं उसकी किसी से!

देखें हैं बैर के रूप हज़ारों हज़ार

काट कर रख देता बन औज़ार

       हमारी संवेदना को-

इतनी नुकीली,तीव्र उसकी धार

कि पल में कर जाए उसे तार तार!

हर सुन्दर उद्वेग को,जला जला कर

बुद्धि,विवेक को तिलांजली दे कर

          कर देता है राख

उस की लीपा-पोती ख़ुद पर कर-

पोत कर कालिख , इतराता उम्र भर !

क्या खोया,कितना खोया,नहीं अंदाज़ा

ज़हरीले विचारों से ख़ुद को नवाज़ा

           खो दिया माधुर्य

कोमलता का बंद कर दिया दरवाज़ा

संयम , सहिष्णुता का निकाला जनाज़ा!

विषैलेपन ने छीन ली विचक्षण शक्ति,बैर ने-

दुनिया के रंगो,उमंगों,उल्लास,धैर्य से

           कर लिया किनारा

लगे खुशियों से ,अपनों से मुंह मोड़ने

बेरंग,बेहाल,उदास, किया पल में किसी ग़ैर ने!

बैर है अपना दुश्मन , कर देगा जीना दुश्वार

अपना भी,औरों का भी-जीवन के दिन चार

       सूखे नीरस कड़क पत्ते की तरह

होंगे दूभर,वंचित हर खुशी से-जब बैर खूंखार

कस कर हमें अपने शिकंजे मे,करता रहेगा वार!

बैर से दोस्ती नहीं है करनी मुझे,चाहूं अगर प्यार-

इस दुनिया से,अपनों से,खुद से कैसे माँगू प्यार-

           जो दें हम वही तो मिलेगा

क्यों बांटूं नफ़रत और बैर चाहूं अगर मैं प्यार

सार्थक जीवन करना चाहूँ अगर- दूं प्यार,लूं प्यार!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational