बालदिवस
बालदिवस
नटखट-नटखट नव तारे,
चाचा नेहरू के प्यारे,
हम सबकी मुस्कान बने,
ये बच्चे जहाँ के उजियारे।
मोहक इनकी हैं अदाएँ,
शरारत भरी मन की इच्छाएँ,
धूम तमाशों के खेल ये खेलें,
इनसे जुड़ी सबकी आशाएँ।
कल्पना की हैं पतंग उड़ाते,
जो जी चाहता सब कर जाते,
कभी न मंजूर इनको हार,
हौसले से अपने बुलंदियाँ पाते।
बंद मुट्ठी में संसार बसा,
सबके लिए निश्छल प्यार बसा,
सपनों में नवीनतम संसार,
इनसे ही हर घर परिवार हँसा।
नयनों से बलाएँ उतारो,
नये कदमों की राह सँवारो,
चमत्कार इन्हीं का तब होगा,
नयी ऊँचाई पर यह जग होगा।
