बाल मनोविज्ञान
बाल मनोविज्ञान
नन्हे बालक के
गुलाबी अधरों पर
खिली मुस्कान
जैसे भोर का किरन
आँखों मे मचलते आँसू
जैसे सीप में ढुलकता मोती
किसे प्रिय नहीं होती ?
पल भर में भुला देता है
गहन पीड़ा को
चाहता रहे
नित
विविध क्रीड़ा को ।
स्वच्छ दरपन जैसा
निर्मल मन
जैसे धुला हुआ
दरपन ।
न ईर्ष्या न मोह
पल में प्रसन्नता
पल में कोह
बाल मन की
निर्मल मुस्कान
भरती ही रहती
मृतकों में जान
अद्भुत होता है
बाल मनोविज्ञान ।
