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डॉ. रंजना वर्मा

Abstract

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डॉ. रंजना वर्मा

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बाल मनोविज्ञान

बाल मनोविज्ञान

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नन्हे बालक के

गुलाबी अधरों पर

खिली मुस्कान

जैसे भोर का किरन

आँखों मे मचलते आँसू

जैसे सीप में ढुलकता मोती

किसे प्रिय नहीं होती ?

पल भर में भुला देता है

गहन पीड़ा को

चाहता रहे 

नित 

विविध क्रीड़ा को ।

स्वच्छ दरपन जैसा

निर्मल मन

जैसे धुला हुआ 

दरपन ।

न ईर्ष्या न मोह

पल में प्रसन्नता

पल में कोह

बाल मन की

निर्मल मुस्कान

भरती ही रहती

मृतकों में जान

अद्भुत होता है

बाल मनोविज्ञान ।



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