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Dr Manisha Sharma

Abstract

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Dr Manisha Sharma

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अस्तित्व

अस्तित्व

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तुमने चाहा, हँस दी मैं

तुमने चाहा, रो दी मैं


तुम कहो तो दिन मेरा

तुम कहो तो मेरी रात


ये मेरी बात तेरी बात

सब है केवल तेरी बात


सारी बात तेरी बात 

इसमें मेरी क्या औकात।


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