STORYMIRROR

Dr Manisha Sharma

Abstract

2  

Dr Manisha Sharma

Abstract

अस्तित्व

अस्तित्व

1 min
183

तुमने चाहा, हँस दी मैं

तुमने चाहा, रो दी मैं


तुम कहो तो दिन मेरा

तुम कहो तो मेरी रात


ये मेरी बात तेरी बात

सब है केवल तेरी बात


सारी बात तेरी बात 

इसमें मेरी क्या औकात।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Abstract