STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

3  

Shailaja Bhattad

Abstract

अस्तित्व

अस्तित्व

1 min
189

जी हजूरी कर ली बहुत।

 थोड़ी खुद से भी बात कर ली जाए।


 हां में हां मिला ली बहुत ।

 नहीं का भी साज अब छेड़ लिया जाए।


 चुपचाप सुनते रहे बहुत।

 अस्तित्व का एहसास लेकिन  

  अब करा दिया जाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract