STORYMIRROR

Monika Sharma "mann"

Abstract

3  

Monika Sharma "mann"

Abstract

अपनत्व का भाव भरें

अपनत्व का भाव भरें

1 min
782


विचारों की ज्योति जला कर

अंधियारे को दूर करें

अपनत्व का दीपक बनाकर

स्नेह का बंधन बने।


राह में जो कंकर पड़े हैं

उनको चुनकर हटाना होगा

यह गैरों का भाव सबसे पहले

खुद से ही मिटाना होगा।


फूलों को जो तोड़ -तोड़ कर

हम फेकेंगे तो

गुलिस्ता कैसे बनाएंगे

प्यार से एक दूसरे का हाथ

थाम कर ही तो

काफिला बनाएंगे।


उस टूटते तारे से पूछो

किस जहां में वह जाएगा ?

सबकी तमन्नाओं का

सहारा वह बन जाएगा।


विचारों की ज्योति जलाकर

अंधियारे को दूर करें

अपनत्व का दीपक बनाकर

स्नेह का बंधन बने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract