अपने बन गये सपने
अपने बन गये सपने
जब मैं छोटी थी मैं देखती थी सपने,
मुझे क्या पता था अपनों ने ही तोड़ दिए मेरे सपने ।
जिसका मैंने सम्मान किया ,
उसने मेरा अपमान है किया।
मैंने ऐसा क्या किया,
किसे कहुँ मैं अपने मन की बात,
जब अपनों ने ही छोड़ दिया मेरा साथ।
जिंदगी ने बहुत कुछ सिखाया है,
क्योंकि मेरे अपनों ने ही दुश्मन का किरदार निभाया है ।
भगवान ने क्यों किया ऐसा मेरे साथ ,
हटा दिया मेरे सर से उनका हाथ।
यह बात नहीं है आम,
जब कोई नहीं आया मेरे काम।
अब उन लोगों की क्या बात करना जिसमें हमारा दिल तोड़ा ,
इन लोगों को छोड़ो,
पर जिंदगी से मुंह ना मोड़ो।
उनके सामने मैंने हाथ जोड़ा ,
पर फिर भी उन्होंने मेरा साथ छोड़ा।
एक दिन ऐसा आएगा,
जब इन लोगों को समझ आ जाएगा।
मत याद करो इन बातों को ,
मत बर्बाद करो अमूल्य रातों को।
आप चिंता मत करो,
क्योंकि ऊपर वाला सब देख रहा है।
जियो जिंदगी को, क्योंकि जिंदगी ना मिलेगी दोबारा!
