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Gantantra Ojaswi

Tragedy


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Gantantra Ojaswi

Tragedy


अपना देश!

अपना देश!

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भाया मुझको अपना देश!

बाहर दंगल, भीतर मंगल

सुन्दर-सा परिवेश!


दावानल है राग-द्वेष का,

नहीं कहीं विश्रान्ति मिली,

आकुल-व्याकुल हर पल हर क्षण,

सौख्य-मंजरी नहीं खिली!

बाहर आना, तनिक न भाया!

फैला रोग - विशेष!! 

भाया मुझको...!


इसको रोना, उसको रोना,

अपना कुछ नहीं फिर क्यों रोना?

सबसे सुन्दर इस जगती में,

अपनी धरती, अपना बिछौना!!

रह जाओ! अब अपने घर पर,

पाओ! हर्ष-विशेष!!

भाया मुझको....!



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