Ankita Akhade
Fantasy
वो मुझसे प्यार करती थी
लोग कहते हे "अफवाह है, अफवाह है।"
वो मुझे छोड़ कर चली गई
और अभी लोग कहते "अफवाह है, अफवाह है।"
तुम देख सकते ...
यकिन तो उस मौ...
अफवाह है अफवा...
दिलं का प्यार...
और ये नक्शा अच्छा बने ये हर एक का प्रयास होता है। और ये नक्शा अच्छा बने ये हर एक का प्रयास होता है।
भूल पाना इस मन्ज़र को, उसके लिए बेमानी जो था। भूल पाना इस मन्ज़र को, उसके लिए बेमानी जो था।
करें शिकवा हम भला क्यों इस ज़िन्दगी से। करें शिकवा हम भला क्यों इस ज़िन्दगी से।
यारो वो धोखेबाज़ नहीं बस जरा जज़्बाती है। यारो वो धोखेबाज़ नहीं बस जरा जज़्बाती है।
बरस जाऊं में थोड़ी सी, बारीश की बौछार संग। बरस जाऊं में थोड़ी सी, बारीश की बौछार संग।
उसका रूठ जाना और मेरा मनाना मेरे लिए अब ये बहुत आम बात है। उसका रूठ जाना और मेरा मनाना मेरे लिए अब ये बहुत आम बात है।
दुनियां को दीवाना कर जाओ किसी हताश निराश को खुशियां दे जाओ। दुनियां को दीवाना कर जाओ किसी हताश निराश को खुशियां दे जाओ।
यहां पर केवल प्रेम ही प्रेम रहेगा नफरतों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। यहां पर केवल प्रेम ही प्रेम रहेगा नफरतों के लिए यहां कोई जगह नहीं है।
या चाहिए हो रास्ता किसी मुश्किल का हाजिर रहूंगा मैं बशर्ते परिस्थिति बनाना तुम। या चाहिए हो रास्ता किसी मुश्किल का हाजिर रहूंगा मैं बशर्ते परिस्थिति बनाना...
पर करें तो क्या कहें तो क्या सब कुछ हम कहां कह पाते हैं। पर करें तो क्या कहें तो क्या सब कुछ हम कहां कह पाते हैं।
कभी नहीं रखती उन्हें मैं दरवाजे के पास बनी ताक में कभी नहीं रखती उन्हें मैं दरवाजे के पास बनी ताक में
उसकी समझूँ न कारिस्तानी क्या साजन ? नहिं पाकिस्तानी ! उसकी समझूँ न कारिस्तानी क्या साजन ? नहिं पाकिस्तानी !
सोचो क्या खूब वो रात होगी जब लगें कि वही ख्वाब उसे भी सताता होगा। सोचो क्या खूब वो रात होगी जब लगें कि वही ख्वाब उसे भी सताता होगा।
मुझे आती हैं दिन-रात हिचकियां तुम अब भी मुझे याद करती होगी। मुझे आती हैं दिन-रात हिचकियां तुम अब भी मुझे याद करती होगी।
चढ़े फिर जो सूरज मैं लौट आऊं किसी रोज़....... चढ़े फिर जो सूरज मैं लौट आऊं किसी रोज़.......
मेरी पहली कविता वह विस्मृति गर्भ में डूब गई। मेरी पहली कविता वह विस्मृति गर्भ में डूब गई।
देह अग्नि जल जाऊँ मैं तो नीर बहाऊँ द्रवित हृदय से पी पी टेर लगाऊँ। देह अग्नि जल जाऊँ मैं तो नीर बहाऊँ द्रवित हृदय से पी पी टेर लगाऊँ।
क्या मिला क्या खो गया है, दुखमयी इस गॉंव में क्या मिला क्या खो गया है, दुखमयी इस गॉंव में
गहना है यह हँसी हमारी इसके बिना अधूरा हर शृंगार है। गहना है यह हँसी हमारी इसके बिना अधूरा हर शृंगार है।
चिल्लाई, चीखी व मूर्छित हो अपने ही वजूद में सिमटी, चोटिल ठहरी रही। चिल्लाई, चीखी व मूर्छित हो अपने ही वजूद में सिमटी, चोटिल ठहरी रही।