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Ankita Akhade

Abstract

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Ankita Akhade

Abstract

तुम देख सकते हो

तुम देख सकते हो

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ख्वाबो की खिडकी से 

मैं नया जहां देख रही हूँ

बरसो की हवा से 

आज मै खेल रही हूँ

ये चिड़ियों की आवाज 

जो नहीं सुनी थी मैने 

कई सालो से 

आज उनके साथ इस खुले 

आसमान मैं उडी जा रही हूँ

सब देख सकते हो मुझे 

मैं कैसे अजब हो रही हूँ

कागज के चारो तरफ देखे 

थे सपने मैने कुछ 

वही सपना सच कर रही हूँ

जिस घर के छत पर बिताये थी

राते हमने मिलकर 

आज उसी छत पर और एक छत

खडी कर रही हूँ

तुम देख सकते हो मुझे 

तुम्हारी होकर कैसे दूर 

जा रही हूँ | 



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