STORYMIRROR

Ankita Akhade

Abstract

3  

Ankita Akhade

Abstract

तुम देख सकते हो

तुम देख सकते हो

1 min
238

ख्वाबो की खिडकी से 

मैं नया जहां देख रही हूँ

बरसो की हवा से 

आज मै खेल रही हूँ

ये चिड़ियों की आवाज 

जो नहीं सुनी थी मैने 

कई सालो से 

आज उनके साथ इस खुले 

आसमान मैं उडी जा रही हूँ

सब देख सकते हो मुझे 

मैं कैसे अजब हो रही हूँ

कागज के चारो तरफ देखे 

थे सपने मैने कुछ 

वही सपना सच कर रही हूँ

जिस घर के छत पर बिताये थी

राते हमने मिलकर 

आज उसी छत पर और एक छत

खडी कर रही हूँ

तुम देख सकते हो मुझे 

तुम्हारी होकर कैसे दूर 

जा रही हूँ | 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract