Karishma Warsi
Abstract
मैं जब हंसती हूँ, तो अक्सर मेरा ध्यान
मेरी हँसी पर चला जाता है,
क्योंकि यहाँ बारिशें हर रोज़,
और बसंत कभी-कभी आता है।
"फिर भी वो उठ...
सियासत
पहली और आख़िरी...
सरज़मी हिंदुस्...
मेरी वफ़ा
ग़ज़ल (एक कोशिश...
2022
उत्तराखंड
सरज़मीं हिंदुस...
ग़ज़ल
अब कहां वो नयनभिविराम अनुपम छटा शहर के वाशिंदों ने निगल लिया अनुपम गांव। अब कहां वो नयनभिविराम अनुपम छटा शहर के वाशिंदों ने निगल लिया अनुपम गांव।
शाम सवेरे तुम तो बस खुद में ही खोई रहती हो। शाम सवेरे तुम तो बस खुद में ही खोई रहती हो।
उम्मीदों की भी अपनी कहानी ख्वाबों में अक्सर खिलती हक़ीक़त में गुम हो जाती। उम्मीदों की भी अपनी कहानी ख्वाबों में अक्सर खिलती हक़ीक़त में गुम हो जाती...
प्रभु को मन में बसा कर देखो, जीवन में प्रभु की कृपा मिल जाएगी। प्रभु को मन में बसा कर देखो, जीवन में प्रभु की कृपा मिल जाएगी।
सुकून दिल से होता है कोई भूखा नंगा होकर भी सुकून से दिन गुजारता है, सुकून दिल से होता है कोई भूखा नंगा होकर भी सुकून से दिन गुजारता है,
वो जा चुका है तेरी गलियों से अब तुम भी तो जीवन को यूँ बेकार ना करो ! वो जा चुका है तेरी गलियों से अब तुम भी तो जीवन को यूँ बेकार ना करो !
साथ है मेरे आवाज़ तुम्हारी जो कानों में गूंजती है मेरे ! तुम नहीं हो साथ मगर तुम्हारी य साथ है मेरे आवाज़ तुम्हारी जो कानों में गूंजती है मेरे ! तुम नहीं हो साथ मगर त...
आज इतना समझ आ गया कि तुम मेरे बिना कहीं भी रह जाओगे। आज इतना समझ आ गया कि तुम मेरे बिना कहीं भी रह जाओगे।
बचैनी कितनी चंचल है अचंचल से रूठे तक न।। बचैनी कितनी चंचल है अचंचल से रूठे तक न।।
कौन है भला जो संसार सत्य से अनजान है कौन है भला जो संसार सत्य से अनजान है
महबूब ही बता सकता है कैसी उसकी महबूबा है। महबूब ही बता सकता है कैसी उसकी महबूबा है।
रहे अमर हमारा यह वतन । बोलो जय-जय गणतंत्र दिवस।। रहे अमर हमारा यह वतन । बोलो जय-जय गणतंत्र दिवस।।
हुनर तनहाई पर उसने, इस कदर आजमाया था मेरे साथ तमाम उम्र चला, वो सिर्फ मेरा साया था। हुनर तनहाई पर उसने, इस कदर आजमाया था मेरे साथ तमाम उम्र चला, वो सिर्फ मेरा सा...
कहीं सलवार कुर्ता, कहीं घाघरा चोली, कहीं धोती कुर्ता की है बात निराली। कहीं सलवार कुर्ता, कहीं घाघरा चोली, कहीं धोती कुर्ता की है बात निराली।
कभी मुसकुराए किसी बात पर, चलो उन लम्हों को खोज लें, कभी मुसकुराए किसी बात पर, चलो उन लम्हों को खोज लें,
नकाबपोशी का इल्जाम लगाते है लोग दूसरों के गमों में मजा लेने वालों नकाबपोशी का इल्जाम लगाते है लोग दूसरों के गमों में मजा लेने वालों
दोस्तों अब तो लिखने से पहले ही, कलम को पोलियो जकड़ता है। छंद मुक़्त हो या छंद युक्त, दोस्तों अब तो लिखने से पहले ही, कलम को पोलियो जकड़ता है। छंद मुक़्त हो या छ...
वर्ना हर दोस्त "जमीं और आसमां" बन जाएंगे खफा की दीवारें होंगी इतनी ऊंची कि "हम - तुम" वर्ना हर दोस्त "जमीं और आसमां" बन जाएंगे खफा की दीवारें होंगी इतनी ऊंची कि ...
भंवर में जानबूझकर "सृजिता" डुबोई थी कभी। सुनहरे लम्हों से भरी वो नाव मांगता है।। भंवर में जानबूझकर "सृजिता" डुबोई थी कभी। सुनहरे लम्हों से भरी वो नाव मांगता ह...
ये परंपरागत तीर्थ स्थलों के मध्य मनुष्य के घर जैसा है ये परंपरागत तीर्थ स्थलों के मध्य मनुष्य के घर जैसा है