STORYMIRROR

Rajesh kumar sharma purohit

Abstract

4  

Rajesh kumar sharma purohit

Abstract

अनजान सफर

अनजान सफर

1 min
503


ये जिन्दगी संघर्षो की यात्रा है

मिलते है कई अनजान यहाँ


जो करते है छल धोखा यहाँ

कोई प्रेम करते कोई घृणा


ये अनजाना सफर यूँ ही

गुजरता जाता है सतत


कालचक्र के पहियों में

पिसता जाता है मानव


देखते आये है सदियों से

बेबसी में जीते मानव


मौन रहकर जीते जो

घुट घुट कर जिन्दगी


अनजाना सफर चलता

कभी रुकता नहीं दोस्तों



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract