Read On the Go with our Latest e-Books. Click here
Read On the Go with our Latest e-Books. Click here

Rajesh kumar sharma purohit

Inspirational


4  

Rajesh kumar sharma purohit

Inspirational


दोहे

दोहे

1 min 219 1 min 219


धुंध गजब की छा गई, मौसम बदला आज।

दिवस लगे अब रात सम,गिरती मन पर गाज।।


पनघट सूखे हो गए,सखी न चलती साथ।

गगरी घर दिखती नहीं,खाली लगते हाथ।।


टटका भोजन खाइए,प्रतिदिन ही श्रीमान।

रखे निरोगी वो तुम्हें,मेरा कहना मान।।


गुल्लक आता काम में,समझो मेरे लाल।

ये ही कर देगा तुम्हें,समझो मालामाल।।


मोहन मटकी फोड़ता,लेकर हाथ गुलेल।

रोज रोज ही खेलता, अजब निराले खेल। 


बच्चे दौड़े आ रहे, हो रहे अब अधीर।

दे दो दादी अब हमें,मीठी सी रसखीर।।


लाड़ लड़ाती मात है,देखो कैसे रोज।

गलती पर वो डांटती, करती रहती खोज।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Rajesh kumar sharma purohit

Similar hindi poem from Inspirational