अनाम शाहिद
अनाम शाहिद
एक दिया अनाम शहीदों के नाम।
उन सब को शत-शत प्रणाम
खून का कतरा -कतरा किया
देश पर कुर्बान।
जब तक था सांसों में दम
लहराया अपने देश का परचम।
तिरंगे की आन -बान रखी,
मातृभूमि की शान रखी
भारत माता प्यारी उन्हें,
लगती छवि बड़ी न्यारी उन्हें
कैसे गद्दारों को वह सह पाते,
क्यों ना मज़ा उन्हें वह चखाते?
वह तो दे ही देंगे, देश हेतु रे जान
एक दिया अनाम शहीदों के नाम।
