Satesh Dev Pandey
Action
आजादी के लिए
भारत देश के वीरों
उछाह भरा संघर्ष
अमृतोस्तव
अरण्य–पथ
इधर उधर खड़े कर दिये गये हैं झूठ के पहाड़ सत्य का साम्राज्य फिर से स्थापित करना होग इधर उधर खड़े कर दिये गये हैं झूठ के पहाड़ सत्य का साम्राज्य फिर से स्थापित ...
डर मत मुसाफिर दर्द से तू , नई राहें है बस अगले मोड़ पे। डर मत मुसाफिर दर्द से तू , नई राहें है बस अगले मोड़ पे।
भ्रष्टाचार में जो डूबे हुये, घट जाता चेहरे का नूर।। भ्रष्टाचार में जो डूबे हुये, घट जाता चेहरे का नूर।।
हम उनकी सुनते नहीं। माफ उन्हें करते नहीं। हम उनकी सुनते नहीं। माफ उन्हें करते नहीं।
मनमोहक खूबसूरती के कारण देश में लोकप्रिय हुआ मनमोहक खूबसूरती के कारण देश में लोकप्रिय हुआ
मानव जब अपनी मानवता पा जाएगा। कलयुग भी सब युगों से बेहतर हो जाएगा। मानव जब अपनी मानवता पा जाएगा। कलयुग भी सब युगों से बेहतर हो जाएगा।
कह देते तुम मुझको जरा एक बार नहीं सुहाते मुझको तुम चुभते हो कह देते तुम मुझको जरा एक बार नहीं सुहाते मुझको तुम चुभते हो
बच्चों पर सोच समझकर धीरे से हाथ उठाना चाहिए। बच्चों पर सोच समझकर धीरे से हाथ उठाना चाहिए।
प्यार पहली बार देखते हमें हुआ, नहीं पता था वो विवाहिता होगी। प्यार पहली बार देखते हमें हुआ, नहीं पता था वो विवाहिता होगी।
नमन उन्हें मैं करता हूं जो, सेवा में दिन-रात लगे, हर मानव वह देवदूत जो, आगे बढ़ क नमन उन्हें मैं करता हूं जो, सेवा में दिन-रात लगे, हर मानव वह देवदूत जो, ...
स्कूल में विज्ञान विषय ये पढ़ाया करती है, घर रोज़ प्रेम का विज्ञान पढ़ाया करती है। स्कूल में विज्ञान विषय ये पढ़ाया करती है, घर रोज़ प्रेम का विज्ञान पढ़ाया कर...
फुटबॉल खेलकर खेलने वालो के अंदर आत्मविश्वास है बढ़ता। फुटबॉल खेलकर खेलने वालो के अंदर आत्मविश्वास है बढ़ता।
अब तो रात को किस मोड़ पर हैवान मिलेगा, नारी जाति को अब दिमाग़ से काम करना है। अब तो रात को किस मोड़ पर हैवान मिलेगा, नारी जाति को अब दिमाग़ से काम करना है...
हो सकें तो दिल के ज़ज़्बात समझना है, शब्दों को सही समयानुसार ही बोलना है। हो सकें तो दिल के ज़ज़्बात समझना है, शब्दों को सही समयानुसार ही बोलना है।
स्वच्छ-सुंदर-सशक्त बनाने में अपना निस्वार्थ योगदान देते हैं...!!! स्वच्छ-सुंदर-सशक्त बनाने में अपना निस्वार्थ योगदान देते हैं...!!!
मन की बात किससे बतलाएं? अपने सपनों को कैसे समझाएं मन की बात किससे बतलाएं? अपने सपनों को कैसे समझाएं
दोपहर रविवार लंच हम करें, बाकी दिन शाम चाय है पीते। दोपहर रविवार लंच हम करें, बाकी दिन शाम चाय है पीते।
हदें तय नहीं होती मोहब्बत करने वालों की, कद्र होती नहीं है मोहब्बत करने वालों की। हदें तय नहीं होती मोहब्बत करने वालों की, कद्र होती नहीं है मोहब्बत करने वालो...
चंद लम्हों में इंसान ही बनना, कभी शैतान तो ना बन जाना। चंद लम्हों में इंसान ही बनना, कभी शैतान तो ना बन जाना।
आज फिर शायद मेहरबान हुआ मेरा रब्बा जो मांगा था उनसे वो समां कैसे है बुलंद किया आज फिर शायद मेहरबान हुआ मेरा रब्बा जो मांगा था उनसे वो समां कैसे है बुलंद कि...