Satesh Dev Pandey
Action
आजादी के लिए
भारत देश के वीरों
उछाह भरा संघर्ष
अमृतोस्तव
अरण्य–पथ
आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अब बतलाओ क्या उत्तर ... आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अ...
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्यों ढूंढे ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्य...
ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात ना होती है ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात न...
क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं। क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं।
बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में बीत जाते है शादी के ये चार दिन नेग चार, बन्ना बन्नी में
छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को चीरा, वीर प्रताप की ... छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को च...
ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा, ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा,
पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ, पहचान मुझे तुम क्या दोगे मैं ख़ुद अपनी पहचान हूँ,
चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है चुप – चुप अम्मा मेरी रहती है लगता की सबसे वो रूठी है
कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है। कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है।
जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ। जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ।
कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया, कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया...
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे ह...
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी। आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी।
अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है। अटल विचार है व्यवहार है जेठ की भरी दोपहरी के बिहारी प्रज्वलित मशाल है।