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FORAM. R. MEHTA

Inspirational

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FORAM. R. MEHTA

Inspirational

अमन शांति का पैगाम

अमन शांति का पैगाम

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हर वर्ष यह बालदिन है आता,

खेल - कूद,नाच-गाने की याद दिला जाता।


दोस्तों के साथ मिल जाता हर खज़ाना, 

फिर लौट कर माँ -पापा की डाँट खाना,


विद्यालय न जाने के लिए पेटदर्द का वही बहाना,

मासूमियत इतनी के अगले पल ही पकड़े जाना।


शिक्षित हो अपने देश का हर बच्चा बच्चा वादा निभाना,

माता-पिता परिवार देश का नाम आगे ले जाकर दिखाना।


बच्चे तो निर्दोष भगवान का रूप कहलाते,

छल-कपट, झूठ-सच के भेदभाव इन्हें कहाँ समझ आते।


मेहनत और लगन से पा लेते अपनी मंज़िल, 

रोक न सके कोई इनको तोड़ देते हर जंजीर। 


मुस्कुराना बच्चों सिखायासारे संकटों से हसते हुए खेले,

सब मिलकर मुसीबत में साथ खड़े रहते इनसे है सुंदर मेले।


लड़ाई झगड़े जाति-धर्म से दूर यह सोच को प्रणाम, 

अमन-शांति का प्रगति का बच्चे देते पैगाम। 



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