अमन शांति का पैगाम
अमन शांति का पैगाम
हर वर्ष यह बालदिन है आता,
खेल - कूद,नाच-गाने की याद दिला जाता।
दोस्तों के साथ मिल जाता हर खज़ाना,
फिर लौट कर माँ -पापा की डाँट खाना,
विद्यालय न जाने के लिए पेटदर्द का वही बहाना,
मासूमियत इतनी के अगले पल ही पकड़े जाना।
शिक्षित हो अपने देश का हर बच्चा बच्चा वादा निभाना,
माता-पिता परिवार देश का नाम आगे ले जाकर दिखाना।
बच्चे तो निर्दोष भगवान का रूप कहलाते,
छल-कपट, झूठ-सच के भेदभाव इन्हें कहाँ समझ आते।
मेहनत और लगन से पा लेते अपनी मंज़िल,
रोक न सके कोई इनको तोड़ देते हर जंजीर।
मुस्कुराना बच्चों सिखायासारे संकटों से हसते हुए खेले,
सब मिलकर मुसीबत में साथ खड़े रहते इनसे है सुंदर मेले।
लड़ाई झगड़े जाति-धर्म से दूर यह सोच को प्रणाम,
अमन-शांति का प्रगति का बच्चे देते पैगाम।
