Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

अलग ही मज़ा

अलग ही मज़ा

1 min
277


कभी ज़िंदगी की उलझनों में

उलझ कर तो देखो

समस्याओं का अपना

अलग ही मज़ा है।


कभी धूप में पसीना,

बहा कर तो देखो

ठंडे पानी का अपना

अलग ही मज़ा है।


कभी पेड़ों को

लगा कर तो देखो

छांव का अपना

अलग ही मज़ा है।


कभी किसी के आंसू

पोंछ कर तो देखो

मुस्कुराहटों का अपना

अलग ही मज़ा है।


कभी किसी की मदद

कर के तो देखो

दुआओं का अपना

अलग ही मज़ा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational